Advertisment

छुपा रुस्तम कछुआ: नीलगिरी वन के रक्षक टीटू की कहानी

पढ़िए नीलगिरी वन के नन्हे कछुए टीटू की रोमांचक कहानी। कैसे एक 'छुपा रुस्तम कछुआ' अपनी बुद्धिमानी और धैर्य से पूरे जंगल को विनाश से बचाता है। बच्चों के लिए बेहतरीन नैतिक शिक्षा।

New Update
chhupa-rustam-kachhua-jungle-story-kids-3
Listen to this article
0.75x1x1.5x
00:00/ 00:00

अक्सर हम लोगों को उनके बाहरी रूप या उनकी रफ़्तार से आंकते हैं। हमें लगता है कि जो तेज़ दौड़ता है या जो ज्यादा चिल्लाता है, वही सबसे काबिल है। लेकिन असल दुनिया में 'काबिलियत' अक्सर शांति और गहरे अवलोकन (observation) में छिपी होती है। यह कहानी हमें सिखाती है कि 'छुपा रुस्तम कछुआ' वही होता है जो वक्त आने पर अपनी बुद्धि का सही इस्तेमाल करे। नीलगिरी वन की यह दास्तान बच्चों को बताएगी कि क्यों हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती और क्यों धैर्य ही सबसे बड़ी ताकत है।

नीलगिरी वन और घमंडी चीता 'सिंबा'

हिमालय की तलहटी में एक बहुत ही सुंदर जंगल था—नीलगिरी वन। यहाँ के पेड़ इतने ऊँचे थे कि बादलों को छूते थे। इस जंगल का सबसे चर्चित जानवर था सिंबा, जो एक बहुत ही फुर्तीला और घमंडी चीता था। सिंबा का मानना था कि रफ़्तार ही सब कुछ है। वह अक्सर छोटे जानवरों का मज़ाक उड़ाता था।

chhupa-rustam-kachhua-jungle-story-kids1

उसी जंगल के एक शांत कोने में टीटू नाम का एक कछुआ रहता था। टीटू बहुत ही शांत स्वभाव का था। वह घंटों तक एक ही जगह बैठकर पत्तों की सरसराहट सुनता या मिट्टी में चलने वाली चींटियों को देखता रहता था। सब उसे 'आलसी' और 'धीमा' कहते थे, पर टीटू कभी बुरा नहीं मानता था। उसे जंगल की हर छोटी-छोटी बात का पता था—कौन सा फल कब पकता है, हवा का रुख कब बदलता है और कौन सी जड़ पानी को सोखती है।

जब नीलगिरी वन पर आया संकट: भीषण सूखा

एक साल नीलगिरी वन में बिल्कुल बारिश नहीं हुई। नदियाँ सूख गईं, पेड़ों के पत्ते झड़ने लगे और जंगल की हरियाली गायब होने लगी। सभी जानवर प्यास से बेहाल थे। जंगल का मुख्य झरना भी सूख चुका था। शेर राजा ने सभा बुलाई।

Advertisment

"अगर हमें जल्द ही पानी का नया स्रोत नहीं मिला, तो हमें यह जंगल छोड़ना होगा," राजा ने भारी मन से कहा।

तभी सिंबा चीता आगे बढ़ा, "महाराज, मेरी रफ़्तार बिजली जैसी है। मैं कुछ ही घंटों में पूरे जंगल का चक्कर लगाकर पानी ढूंढ लाऊंगा।" सिंबा दौड़ पड़ा। उसके पीछे लोमड़ी और हिरण भी अपनी तेज़ी दिखाने निकल पड़े। टीटू भी सभा में था, पर किसी ने उसकी ओर नहीं देखा।

सिंबा की विफलता और टीटू की शांति

तीन दिन बीत गए। सिंबा वापस लौटा, उसके पैर थक चुके थे और गला सूख गया था। "महाराज, मैंने उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम सब देख लिया। कहीं पानी नहीं है। अब हमारा अंत निश्चित है।"

तभी टीटू धीरे से रेंगते हुए आगे आया। "महाराज, अगर आप आज्ञा दें, तो मैं पानी ढूंढने में मदद कर सकता हूँ।"

सिंबा ज़ोर से हँसा, "अरे ओ टीटू! मैं तीन दिन में पूरा जंगल छान आया और मुझे कुछ नहीं मिला। तुम तो वहाँ पहुँचते-पहुँचते अगले साल की बारिश तक पहुँचोगे! तुम क्या ढूंढोगे?"

टीटू ने शांति से जवाब दिया, "सिंबा भाई, आपने दूर देखा, पर शायद आपने नीचे नहीं देखा। पानी हमेशा ऊपर नहीं होता, कभी-कभी वह हमारे पैरों के नीचे भी होता है।"

टीटू की जादुई खोज: तर्क और बुद्धि का कमाल

टीटू ने राजा और कुछ जानवरों को जंगल के उस पुराने सूखे बरगद के पेड़ के पास चलने को कहा, जहाँ की ज़मीन पथरीली थी। सिंबा ने मज़ाक उड़ाया, "यहाँ तो धूल उड़ रही है, यहाँ पानी कहाँ होगा?"

टीटू ने तर्क दिया, "ध्यान से देखिए महाराज। इस भीषण गर्मी में भी, इस बरगद के पेड़ की कुछ जड़ें अभी भी नरम हैं। और देखिए, ये काली चींटियाँ जो आमतौर पर नम जगहों पर रहती हैं, वे इस पत्थर के नीचे के छेद से बाहर आ रही हैं। इसका मतलब है कि यहाँ नीचे पानी की एक गुप्त धारा बह रही है।"

chhupa-rustam-kachhua-jungle-story-kids-2

टीटू ने सबको बताया कि हज़ारों साल पहले यहाँ एक प्राचीन नदी बहती थी जो अब पाताल में चली गई है। जानवरों ने मिलकर उस जगह पर खुदाई शुरू की। जैसे-जैसे वे गड्ढा खोदते गए, मिट्टी गीली होने लगी। और अचानक—फव्वारा! ज़मीन के अंदर से ठंडे और मीठे पानी की एक तेज धारा फूट पड़ी।

पूरा जंगल खुशी से झूम उठा। टीटू की तेज़ नज़रों और उसकी तर्कशक्ति ने सबको बचा लिया था।

छुपा रुस्तम: टीटू का सम्मान

सिंबा का सिर शर्म से झुक गया। उसने महसूस किया कि रफ़्तार से आप मीलों तय कर सकते हैं, लेकिन गहराई तक पहुँचने के लिए 'धैर्य' और 'बुद्धि' की ज़रूरत होती है। राजा ने टीटू को "जंगल का रक्षक" घोषित किया।

उस दिन के बाद, कोई भी टीटू को 'धीमा' कहकर नहीं चिढ़ाता था। सब जान गए थे कि टीटू एक 'छुपा रुस्तम कछुआ' है, जो अपनी चुप्पी में हज़ारों राज और बुद्धिमानी समेटे हुए है।

कहानी की सीख (Moral of the Story)

यह कहानी हमें सिखाती है कि "किसी की योग्यता का अंदाज़ा उसकी रफ़्तार या बाहरी चमक-धमक से नहीं लगाना चाहिए।" धैर्यवान व्यक्ति अक्सर वह देख लेता है जिसे जल्दबाज़ लोग अनदेखा कर देते हैं। बुद्धिमानी और अवलोकन की शक्ति सबसे बड़ी शारीरिक ताकत से भी ऊपर होती है। साथ ही, यह भी कि हर जीव की अपनी एक विशेष भूमिका होती है।

कछुओं की प्रजातियों और उनके स्वभाव के बारे में और अधिक जानने के लिए आप कछुआ - विकिपीडिया देख सकते हैं। 

और पढ़ें : 

मोंटी का स्कूल: नीलगीरी जंगल की सबसे अनोखी और समझदार पाठशाला (Jungle Story)

प्रयास करना ना छोड़ें: चिकी गिलहरी और वो लाल रसीला फल (Motivational Story)

खरगोश की चालाकी: जब नन्हे बंटी ने खूंखार भेड़िये को सिखाया सबक

चूहे और चिड़िया की दोस्ती: जंगल की एक अनोखी और साहसी कहानी

Advertisment